मंगलवार, 19 अगस्त 2014

प्याज व लहसुन से करें समान्य रोगों का उपचार

कच्चे प्याज के कुछ स्वास्थ्य लाभ
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एनीमिया ठीक करे

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प्याज काटते वक्त आंखों से आंसू टपकते हैं,
ऐसा प्याज में मौजूद सल्फर की वजह से होता है
जो नाक के दृारा शरीर में प्रेवश करता है। इस
सल्फर में एक तेल मौजूद होता है
जो कि एनीमिया को ठीक करने में सहायक
होता है। खाना पकाते वक्त यही सल्फर जल
जाता है, तो ऐसे में कच्चा प्याज खाइये।


कब्ज दूर करे-

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इसमें मौजूद रेशा पेट के अंदर के चिपके हुए भोजन
को निकालता है जिससे पेट साफ हो जाता है,

तो यदि आपको कब्ज की शिकायत है

तो कच्चा प्याज खाना शुरु कर दीजिये।


गले की खराश मिटाए-

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यदि आप सर्दी, कफ या खराश से पीडित हैं
तो आप ताजे प्याज का रस पीजिये। इमसें गुड
या फिर शहद मिलाया जा सकता है।


ब्लीडिंग समस्या दूर करे-

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नाक से खून बह रहा हो तो कच्चा प्याज काट
कर सूघ लीजिये। इसके अलावा यदि पाइल्स
की समस्या हो तो सफेद प्याज खाना शुरु कर दें।


मधुमेह करे कंट्रोल-

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यदि प्याज को कच्चा खाया जाए तो यह शरीर
में इंसुलिन उत्पन्न करेगा, तो यदि आप
डायबिटिक हैं तो इसे सलाद में खाना शुरु कर दें।


दिल की सुरक्षा-

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कच्चा प्याज हाई ब्लड प्रेशर को नार्मल करता है
और बंद खून की धमनियों को खोलता है जिससे
दिल की कोई बीमारी नहीं होती।


कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करे-

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इसमें मिथाइल सल्फाइड और अमीनो एसिड
होता है जो कि खराब कोलेस्ट्रॉल को घटा कर
अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढाता है।


कैंसर सेल की ग्रोथ रोके-

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प्याज में सल्फर तत्व अधिक होते हैं। सल्फर शरीर
को पेट, कोलोन, ब्रेस्ट, फेफडे और प्रोस्टेट कैंसर से
बचाता है। साथ ही यह  यूरिन इन्फेक्शन से भी बचता है  


                                                                                                              लहसुन                

              
                                                            
लहसुन सिर्फ खाने के स्वाद को ही नहीं बढ़ाता बल्कि शरीर के लिए एक औषधी की तरह भी काम करता है।इसमें प्रोटीन, विटामिन, खनिज, लवण और फॉस्फोरस, आयरन विटामिन ,बी सी भी पाए जाते हैं। लहसुन शरीर की रोग प्रतिरोधी क्षमता को बढ़ाता है। भोजन में किसी भी तरह इसका सेवन करना शरीर के लिए बेहद फायदेमंद होता है आज हम बताने जा रहे हैं आपको औषधिय गुण से भरपूर लहसुन के कुछ ऐसे ही नुस्खों के बारे में जो नीचे लिखी स्वास्थ्य समस्याओं में रामबाण है।


1-- 100 ग्राम सरसों के तेल में दो ग्राम (आधा चम्मच) अजवाइन के दाने और आठ-दस लहसुन की कुली डालकर धीमी-धीमी आंच पर पकाएं। जब लहसुन और अजवाइन काली हो जाए तब तेल उतारकर ठंडा कर छान लें और बोतल में भर दें। इस तेल को गुनगुना कर इसकी मालिश करने से हर प्रकार का बदन का दर्द दूर हो जाता है।


2-- लहसुन की एक कली छीलकर सुबह एक गिलास पानी से निगल लेने से रक्त में कोलेस्ट्रॉल का स्तर नियंत्रित रहता है।साथ ही ब्लडप्रेशर भी कंट्रोल में रहता है।


3-- लहसुन डायबिटीज के रोगियों के लिए भी फायदेमंद होता है। यह शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में कारगर साबित होता है।


4-- खांसी और टीबी में लहसुन बेहद फायदेमंद है। लहसुन के रस की कुछ बूंदे रुई पर डालकर सूंघने से सर्दी ठीक हो जाती है।


5-- लहसुन दमा के इलाज में कारगर साबित होता है। 30 मिली लीटर दूध में लहसुन की पांच कलियां उबालें और इस मिश्रण का हर रोज सेवन करने से दमे में शुरुआती अवस्था में काफी फायदा मिलता है। अदरक की गरम चाय में लहसुन की दो पिसी कलियां मिलाकर पीने से भी अस्थमा नियंत्रित रहता है।


6-- लहसुन की दो कलियों को पीसकर उसमें और एक छोटा चम्मच हल्दी पाउडर मिला कर क्रीम बना ले इसे सिर्फ मुहांसों पर लगाएं। मुहांसे साफ हो जाएंगे।


7-- लहसुन की दो कलियां पीसकर एक गिलास दूध में उबाल लें और ठंडा करके सुबह शाम कुछ दिन पीएं दिल से संबंधित बीमारियों में आराम मिलता है।


8-- लहसुन के नियमित सेवन से पेट और भोजन की नली का कैंसर और स्तन कैंसर की सम्भावना कम हो जाती है।


9-- नियमित लहसुन खाने से ब्लडप्रेशर नियमित रहता है। एसीडिटी और गैस्टिक ट्रबल में भी इसका प्रयोग फायदेमंद होता है। दिल की बीमारियों के साथ यह तनाव को भी नियंत्रित करती है।


10-- लहसुन की 5 कलियों को थोड़ा पानी डालकर पीस लें और उसमें 10 ग्राम शहद मिलाकर सुबह -शाम सेवन करें। इस उपाय को करने से सफेद बाल काले हो जाएंगे।


11- यदि रोज नियमित रूप से लहसुन की पाँच कलियाँ खाई जाएँ तो हृदय संबंधी रोग होने की संभावना में कमी आती है। इसको पीसकर त्वचा पर लेप करने से विषैले कीड़ों के काटने या डंक मारने से होने वाली जलन कम हो जाती है।


12- जुकाम और सर्दी में तो यह रामबाण की तरह काम करता है। पाँच साल तक के बच्चों में होने वाले प्रॉयमरी कॉम्प्लेक्स में यह बहुत फायदा करता है। लहसुन को दूध में उबालकर पिलाने से बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। लहसुन की कलियों को आग में भून कर खिलाने से बच्चों की साँस चलने की तकलीफ पर काफी काबू पाया जा सकता है। 

13- लहसुन गठिया और अन्य जोड़ों के रोग में भी लहसुन का सेवन बहुत ही लाभदायक है।


लहसुन की बदबू-


अगर आपको लहसुन की गंध पसंद नहीं है कारण मुंह से बदबू आती है। मगर लहसुन खाना भी जरूरी है तो रोजमर्रा के लिये आप लहसुन को छीलकर या पीसकर दही में मिलाकर खाये तो आपके मुंह से बदबू नहीं आयेगी। लहसुन खाने के बाद इसकी बदबू से बचना है तो जरा सा गुड़ और सूखा धनिया मिलाकर मुंह में डालकर चूसें कुछ देर तक, बदबू बिल्कुल निकल जायेगी।

सोमवार, 26 अगस्त 2013

कुछ घरेलू उपचार


janki.oli@gmail.comदांतों की मजबूती के लिये १-

 यदि मल-मूत्र त्याग के समय रोजाना उपर-नीचे के दांत को भींचकर बैठा जाये तो दांत जीवन नहीं हिलते। इससे दांत मजबूत होते है और जल्दी नहीं गिरते। लकवा मारने का डर भी नहीं रहता।

 जब भी टोयलेट करने जायें ऐसी आदत अवश्य डालनी चाहिये। इससे दांतों का पायरिया,खून या पीप आना, दांतों का हिलना बहुत शीघ्र बन्द हो जाता है। हिलते दांत आश्चर्यजनक रूप से दृढ़ हो जाते हैं।


  घुटनों का दर्द 

१- हल्दी, मैथी व सौठ बारीक चूर्ण की एक से दो चम्मच की मात्रा से पानी के साथ फक्की लगाने से घुटनों का दर्द समाप्त हो जाता है । विशेषकर बुढापे में घुटने नहीं दुखते ।

 इससे एड़ी का दर्द भी चला जाता है । लगातार कुछ समय तक इसका प्रयोग करे।

 २- Exercise मे हलासन करे व एक कुर्सी मे बैठ कर एक-एक कर पैर को उपर उठाये व नीचे करे लाभ होगा !

 ३- अनुलोम विलोम प्रणायाम २० से ३० मिनट नित्य करने से घुटनो के कार्टेज बनने लगते है ! ४- एलोवीरा का रस खाली पेट नित्य पीये !


  कमर दर्द

रात में 60ग्राम गेहूँ के दाने पानी में भिगो दें । सुबह इन भीगे हुए गेहूँ के साथ तीस ग्राम खसखस तथा तीस ग्राम धनिया की मींगी मिलाकर बारीक पीस लें । इस पेस्ट को दूध से पकालें और खीर बना लें । इस खीर को अपनी आवश्यकतानुसार सप्ताह-दो सप्ताह खाने से कमर का दर्द दूर हो जाता है एवं कमजोरी दूर होती है।

 भुजंगासन, शलभासन,मर्कटासन, व उत्तानपादासन आदि आसन नित्य करे!

  बवासीर

१- दो सूखे अंजीर शाम को पानी में भिगो दें। सवेरे खाली पेट उनको खाँये। इसी प्रकार सवेरे के भिगोये दो अंजीर शाम चार-पाँच बजे खाँयें। एक घंटा आगे-पीछे कुछ नहीं खायें। आठ-दस दिन के सेवन से बादी और खूनी हर प्रकार की वबासीर ठीक हो जाती है

 २- नाग दून के २ या ३ पत्ते प्रातः खाली पेट ३ य ४ दिन ले,या सुबह खाली पेट एक केले के बीच मे चने के दाने के बराबर देशी कपूर डालकर २ या ३ दिन सेवन करे!

 ३- कच्चे गाय के दूध मे (एक कप ) एक नीबू निचोड कर खाली पेट ३ या ४ दिन सेवन करे!

 ४- कपालभाति प्राणायाम खाली पेट कम से कम १५ -१५ मिनट करे !

 ५- एलोवीरा का रस खाली पेट नित्य पीये !

  मधुमेह

१- करेला मधुमेह में अमृत है। करेला के सेवन से ब्लड में ग्लुकोज काफी घट जाता है। तले हुए करेले या करेले की सब्जी रोज खाये

. २- मैथीदाना छ: ग्राम लेकर थोड़ा कूट लें और सायं 250 ग्राम पानी में भिगो दें। प्रात: इसे खूब घोंटे और कपडे से छान कर, बिना मीठा मिलाए पी लिया करे। दो मास सेवन करने से मधुमेह से छुटकारा मिल जाता है।

 ३- मिठाई, चावल, स्टार्च, मीठे फल आदि से परहेज करें। दही, फल, हरी शाक-सब्जियाँ, चौलाई, बथुआ, धनिया, पुदीना, पात गोभी, खीरा, ककड़ी, लौकी, बेल पत्र, नारियल, जामुन, करेला, मूली, टमाटर, नींबू, गाजर, प्याज, अदरक, छाछ, भीगे बादाम आदि लेना अधिक उपयोगी हैं।

 ४- कपालभाति व अनुलोम विलोम प्राणायाम खाली पेट कम से कम १५ -१५ मिनट करे !

 ५- मन्डूकासन रोज खाली पेट सुबह व शाम ५ से लेकर २१ बार तक कर सकते है इससे हमारा पेन्क्रियाज एक्टिव होने लगता है !

 ६- गिलोय व एलोवीरा का रस पीये !

  उच्च रक्तचाप [High blood pressure]

 १-प्याज का रस और शुध्द शहद बराबर मात्रा में मिलाकर नित्य दस ग्राम (दो चम्मच) की मात्रा में दिन में एक बार लेना रक्तचाप का प्रभावशाली इलाज है।

 प्याज का रस ब्लड में कोलेस्ट्राल की मात्रा को कम करके दिल के दौरे को रोकता है ।

 २- दालचीनी को पीस कर रख ले,एक चम्मच शहद मे आधा चम्मच पिसी दालचीनी मिलाकर रोज खाली पेट ले!

 ३- सूखे आँवले को पीसकर बारीक चूर्ण बना लें और उसमें आँवलें के बराबर वजन पिसी मिश्री मिलाकर काँच के बर्तन मे रखलें । रोज सवेरे खाली पेट दो चम्मच चूर्ण पानी के साथ लेने से कुछ ही दिनों में हृदय के समस्त रोग दूर हो जाते हैं। विशेषकर हृदय की धड़कन हृदय की कमजोरी आदि रोगो में लाभकारी है

 ४- आँवला दिल के तेज धड़कन,अनियमित हृदयगति, दिल का फैलना, दिल के ठीक से कार्य न करने से उच्चरक्तताप में हानिरहित औषधि और खाद्य पदार्थ है । यह हृदय को शक्तिशाली एवं रक्तवाहिनी को लचीला और मुलायमबनाता है ।

 ४- लहसुन का प्रयोग अपने भोजन मे करे! ५- अनुलोम विलोम प्राणायाम १५ मिनट से लेकर ३० मिनट तक रोज करे !

  निम्न रक्तचाप [ Low blood pressure ]

 १- किशमिश को किसी चीनी मिट्टी के कप में पानी में भिगों दे। बारह घंटे भीगने के बाद प्रात: खूब चबा-चबाकर खाने से निम्न रक्तचाप में बहुत लाभ होता है । पूर्ण लाभ के लिये एक माह तक उपयोग करे!

 २- निम्न रक्तचाप में तात्कालिक लाभ के लिये -बोलना बन्द कर दें । बायीं करवट लेकर लेटॆ !

 ३- नमक का प्रयोग थोडा बडा दे ! ४- कपालभाति व अनुलोम विलोम प्राणायाम नित्य करे !

शनिवार, 7 जनवरी 2012

आंवले के औषधीय गुण



जी हां ये आंवला ही है, जो गरीब व अमीर सभी को सहज उपलब्ध है व बच्चे से बूढे तक सभी के लिये उपयोगी ! क्यों न ऐसे समय में जब आंवले का ही मौसम हो, इसके गुणो पर भी चर्चा कर ली जाये ! आंवला प्रायः भारतवर्ष में सभी जगह पाया जाता है। इसका वृक्ष प्रायः २० से २५ फ़ुट तक ऊंचा होता है। पत्ते इमली के पत्तों की तरह होते हैं।
जंगली आंवले का आकार छोटा होता है तथा यह कुछ कठोर होता है। लेकिन बाग बगीचों में लगाया हुआ आंवला आकार में बडा व गूदेदार होता है। अक्टूबर से लेकर अप्रैल तक आंवले का फ़ल प्राप्त होता है।
आंवले के फल में संतरे के रस से २० गुना अधिक विटामिन सी पाया जाता है। आंवले में सभी रोगों को दूर करने की शक्तिे है। आंवला युवाओं को यौवन प्रदान करता है व बूढों को युवाओं जैसी शक्तिी देता है। इसके सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढती है।
इसे चटनी, अचार, मुरब्बा, शर्बत या कच्चा ही किसी भी रूप में अधिक से अधिक प्रयोग मे लाना चाहिये।
आंवले के कुछ औषधीय उपयोग निम्न हैं।
१- आंवले के सेवन से आंखों की ज्योती बढती है। सूखा आंवला रात को पानी में भिगो दें व सुबह छानकर इसके पानी से आंखें धोने से नेत्र ज्योति बढती है

२- आंवले को कूट कर (लगभग २० ग्राम) लगभग आधा किलो पानी में उसे उबालें व धीमी आंच पर दो घंटे तक उस पानी को छानकर आखों में दिन में तीन बार डालने से नेत्र रोग मे लाभ होता है।

३- पीपली आंवला व सौंठ २-२ ग्राम की मात्रा पीसकर शहद के साथ बार- बार प्रयोग करने से श्वास सम्बन्धी रोग दूर होते हैं।

४- पिसा हुआ आंवला एक चम्मच को एक चम्मच शहद के साथ मिलाकर दिन में दो या तीन बार लेने से खांसी दूर होगी।

५- पिसे हुए आंवले को पानी के साथ फंकी लेकर लगातार लेने से आवाज खुल जायेगी।

६- यदि आखों के आगे अंधेरा छा जाता हो, सिर में जलन हो या बार-बार पेशाब आता हो तो आंवले का रस पानी में मिलाकर सुबह शाम लगातार चार दिन पीने से लाभ होगा।
7- सूखा आवला 30 ग्राम 10 ग्राम बहेड़ा व 50 ग्राम आम की गुठली की गिरी को पीसकर रात भर लोहे की कढ़ाई मे भिगोकर रखे ,बालो पर इसका रोज लेप [करीब एक घंटा ]करने से कम उम्र मे सफ़ेद हुए बाल कुछ ही दिनो मे काले होने लगते है !

8- सूखा आंवला व मिस्री दोनो को पीसकर [ समान मात्रा मे ] एक-एक चम्मच रोज फंकी लेकर खाने से हार्ट संबंधी सभी रोग दूर होते है !

9- यदि दांत मे दर्द हो तो आंवले के रस मे कपूर मिला कर दांत मे रखने से दांत दर्द कम होता है 1

10- यदि किडनी मे पथरी हो तो मूली के साथ आंवला खाने से लाभ होता है !
11- यदि गरमियो में जी घबराता हो तो व चक्कर आते हो तो आंवले का शर्बत पिये, कमजोरी दूर होगी व आपका इम्यून सिस्टम ठीक होगा !

12- सूखा आंवला व काला नमक समान मात्रा मे पीस कर आधा चम्मच पानी से लेने से लूज मोशन बंद हो जाते है !

13- नित्य प्रति आंवले का मुरब्बा खाने से स्मरण शक्ति बढ़ती है !

14- आंवला की गुठली को जला कर उसकी भस्म नारियल के तेल मे मिलकर किसी भी प्रकार की खुजली मे लगाए लाभ होगा !

15- शरीर मे किसी स्थान विशेष मे कट जाने पर रक्त निकाल रहा हो तो तत्काल आंवले का रस लगाने से रक्त निकालना बंद हो जाएगा !

16-आंवले का नित्य प्रयोग करने से सिर के बाल गिरने बंद हो जाते है !

17 -आंवला खाने से मसूड़े स्वस्थ होते है व स्कर्बी नमक रोग दूर होता है !

18 -आंवले का नित्य प्रयोग हमारे शरीर के टाक्सिन्स दूर करता है जिससे शरीर धीरे -धीरे पूर्णतया स्वस्थ हो जाता है !

19-आंवले का उबटन [ पैक ] चेहरे व बालो मे लगाने से चेहरे व बालो की सुंदरता की वृद्धि होती है !

20-ताजे आंवले का रस {1ओंस } प्रातः काल खाली पेट 15 दिन तक लगातार लेने से पेट के कीड़े नष्ट हो जाते है !

21-सूखे आंवले को बारीक पीस कर एक -एक टी स्पून सुबह व शाम दोनों टाईम गाय के दूध की लस्सी या गाय के दूध के साथ लेने से खूनी बाबासीर मे लाभ होता है !

22-रात को एक चम्मच पिसा आंवला या आंवले का रस गुनगुने पानी के साथ लेने से पेट की कब्ज संबंधी समस्याए दूर होती है !

आंवले का प्रयोग सारी उम्र लगातार भी कर सकते है, इसके प्रयोग से कभी कोई साइड इफ़ेक्ट नहीं होता, यह मनुष्य को मिला प्रकृति का एक अनुपम उपहार है!